विशद कुमार 
 
उल्लेखनीय है कि रघुवर दास ने सीएनटी व एसपीटी एक्ट में संशोधन, भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक, 6500 स्कूलों का विलय, देशी-विदेशी पूंजीपतियों के साथ 210 एमओयू (MoU), फर्जी मुठभेड़ में माओवादियों के नाम पर आदिवासियों की हत्या, माओवादियों के नाम पर गिरफ्तारी, हजारों जनता पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करना, रजिस्ट्रर्ड ट्रेड यूनियन ‘मजदूर संगठन समिति’ पर प्रतिबंध लगाना, मॉब लिंचिंग के जरिए मुसलमानों व ईसाइयों के हत्यारों के साथ खुल्लमखुल्ला एकता दिखाना, ग्रामीण क्षेत्रों में दर्जनों सीआरपीएफ कैंप लगाना, सभी कल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने, जनता की आवाज उठाने वालो को जेल में बंद करना, मानदेय पर कार्य कर रहे - पारा शिक्षक, आंगनबाड़ी सेविका-सहायिका, आशा कार्यकर्ता, संविदाकर्मियों आदि के द्वारा अपनी जायज मांगों पर आंदोलन करने पर पुलिस से लाठियां बरसवाना, विस्थापितों के आंदोलन पर गोली चलवाना, भूख से हो रही मौतों को बीमारी से हुई मौत बताना, आदि-आदि क‌ई कुकर्म किये, जिस कारण झारखंड की जुझारू -लडा़कू जनता ने 2019 के झारखंड विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया एवं झामुमो, कांग्रेस व राजद के "महागठबंधन "को सत्ता सौंपी। 
 
29 दिसंबर, 2019 को महागठबंधन की तरफ से झामुमो के हेमंत सोरेन ने झारखंड के मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाले हुए 21 महीने हो चुके हैं, लेकिन जिस वादे व दावे के साथ हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली थी, वह कहीं से पूरा होता नहीं दिख रहा है। आज भी झारखंड में फर्जी मुठभेड़ में आदिवासी- मूलवासी जनता की हत्या, माओवादियों के नाम पर गिरफ्तारी, कल्याणकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार, ग्रामीण क्षेत्रों में  सीआरपीएफ कैंप का निर्माण, भूख से मौत, जमीन की लूट, मॉब लिंचिंग, देशी-विदेशी पूंजीपतियों के साथ एमओयू की कोशिश, आंदोलनकारियों पर लाठीचार्ज, कोयला-बालू-पत्थर की लूट, लैंड पूल जैसे जन विरोधी बिल पास करना, पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रो की कानूनों को कमजोर करना, महिलाओं के के खिलाफ हिंसा, आदि  - आदि घटनायें धड़ल्ले  से हो रही हैं। हेमंत सोरेन की सरकार नौकरशाही व अफसरशाही पर रोक लगाने में पूरी तरह से विफल साबित हुई है। वादे के मुताबिक आदिवासी-मूलवासी विरोधी पुराने स्थानीय नीति रद्द कर, नई स्थानीय नीति भी नहीं बनायीं गयी है।
 
उपरोक्त गंभीर परिस्थितियों को देखते हुए ही हमने झारखंड के तमाम आंदोलनकारी ताकतों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि झारखंड की जुझारू जनता की एकजुट आवाज केन्द्र व राज्य सरकार को सुनाई दे। इसी प्रयास के तहत 3 अक्टूबर, 2021 को एक जन संगठन "झारखंड जन संघर्ष मोर्चा" का स्थापना सम्मेलन का आयोजन बिरसा सेवा आश्रम, बोकारो स्टील सिटी (बोकारो) झारखंड में  किया गया है। 
इस सम्मेलन में "झारखंड जन संघर्ष मोर्चा" के बैनर तले झारखंड को लूटखंड बनाने के विरूद्ध जन संघर्ष का ऐलान करेंगे तथा झारखंड नव निर्माण का संकल्प लेंगे। झारखंड में पूर्व की भाजपा सरकार ने यहां के आदिवासी-मूलवासी जनता पर कहर बरपाया था। भाजपाई मुख्यमंत्री रघुवर दास के नेतृत्व में झारखंड की अस्मिता व संस्कृति को नष्ट करने का अभियान प्रारंभ किया गया था। 
 
अतः मोर्चा के नाम से ही स्पष्ट है कि संघर्षरत जन संगठनों, मानवाधिकार संगठनों, सामाजिक संगठनों, मेहनतकश महिलाओं, छात्र- छात्राओं, युवाओं, प्रगतिशील लेखकों, कवियों, कलाकारों, बुद्धिजीवियों, संस्कृतिकर्मियों का एक साझा मोर्चा होगा।