रायपुर: महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से यूनिसेफ द्वारा आयोजित सप्ताह भर चलने वाले विश्व बाल दिवस 2021 समारोह का आज यहां समापन हुआ। #Goblue, #KidsTakeOver और 'महामारी कक्षा' जैसी गतिविधियों का उद्देश्य बच्चों में सीखने की हानि, बच्चों के खिलाफ हिंसा और बाल अधिकारों जैसे मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाना था।
यूनिसेफ छत्तीसगढ़ के प्रमुख जॉब जकारिया ने कहा कि बच्चों के खिलाफ हिंसा न केवल बच्चों के अस्तित्व और स्वास्थ्य के लिए बल्कि उनके भावनात्मक कल्याण के लिए भी खतरा है। बच्चे व्यापक स्तर पर हिंसा का शिकार हो रहे हैं और भारत में लाखों बच्चों के लिए यह एक कठिन वास्तविकता बनी हुई है। साक्ष्य बताते हैं की इस महामारी के दौरान बच्चों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में वृद्धि हुई है और इसे समाप्त करने के लिए समाज में हर स्तर पर जागरूकता और उपयुक्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
                                                     

                                                                                  'गो ब्लू' के ज़रिये बाल अधिकारों को सरंक्षित करने का सन्देश

विश्व बाल दिवस और बाल अधिकार सम्मेलन मनाने के लिए दुनिया भर के प्रमुख स्मारकों और स्थलों को नीले रंग से उज्ज्वलित किया जाता है। बाल अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए रायपुर में घडी चौक, जयस्तंब चौक, 'मेक इन इंडिया' चौक, तेलीबंदा तालाब और भगत सिंह चौक को नीले रंग से रोशन किया गया।

                                                                                                        ‘महामारी’ कक्षाएं

यूनिसेफ ने रायपुर में कई जगहों पर खाली कक्षाओं और अप्रयुक्त बैगों और किताबों वाली बेंचों के साथ काल्पनिक "महामारी कक्षाएं" लगाईं। यह पिछले 1.5 वर्षों में स्कूलों के बंद होने के कारण सीखने के संकट को उजागर करने के लिए किया गया । ये क्लासरूम शहर के तेलीबांधा तालाब, मैग्नेटो मॉल, सिटी सेंटर मॉल और अंबुजा मॉल में लगाई गयी।
यूनिसेफ के प्रमुख जॉब जकारिया ने यह भी कहा कि बच्चों के सीखने से वंचित रहने के मुद्दे को उजागर करने और माता-पिता और समुदाय के समर्थन से स्कूलों में विशेष पैकेजों के माध्यम से सीखने की पुनः प्राप्ति की आवश्यकता को उजागर करने के लिए 'महामारी कक्षाएं' लगाई गयी हैं। “यह बाल श्रम, बाल विवाह या बाल तस्करी के कारण बच्चों के ड्रॉप-आउट के मुद्दे को भी उठाता है। यूनेस्को के अनुसार, स्कूल बंद होने के 1 महीने के परिणामस्वरूप 2 महीने का सीखने का नुकसान होता है। इसलिए, 1.5 साल के स्कूल बंद होने से छात्रों के लिए 3 साल का सीखने का नुकसान हुआ होगा। इसका मतलब है कि कक्षा 5 का छात्र अब कक्षा 2 के सीखने के स्तर पर है। यह एक गंभीर स्थिति है, जिसे तत्काल संबोधित किया जाना चाहिए,”जकारिया ने कहा।

                                                                                       बच्चों ने प्रमुख विभागों में सांकेतिक कार्यभार संभाला

इस बीच छत्तीसगढ़ में विभिन्न स्थानों पर बच्चों ने सांकेतिक कदम उठाते हुए प्रमुख पदों पर पदभार ग्रहण किया I इसमें शामिल रहे समग्र शिक्षा मिशन, ग्वारेला-पेंड्रा-मरवाही और रायगढ़ के कलेक्टरेट, अविनाश समूह के प्रमुख और एक टेलीविजन समाचार चैनल के समाचार एंकर। इसका उद्देश्य बाल अधिकारों को विश्व बाल दिवस (20 नवंबर ) के मुख्य केंद्र में लाना है I
संजना, नेहा, आर्यन, तान्या, खुशी, उषा, आंचल, हंसराज, आकाश जैसे कई बच्चों ने मिशन निदेशक, समग्र शिक्षा मिशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक और गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले में जिला शिक्षा अधिकारी, IBC24 टेलीविजन में समाचार एंकर के रूप में तथा कॉर्पोरेट निकाय के प्रमुख के रूप में पदभार संभाला।
 
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