भिलाई नगर. देश के प्रसिद्ध श्रमिक नेता शंकर गुहा नियोगी के जीवन संघर्ष पर निर्मित डाक्यूमेंट्री फिल्म लाल जोहार का लौह नगरी दल्ली राजहरा के बाद भिलाई में भी जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला. फिल्म के प्रदर्शन के दौरान मजदूर- किसानों, छात्र और नौजवानों ने इंकलाब- ज़िंदाबाद और लाल जोहार का नारा भी लगाया.

जन संस्कृति मंच की दुर्ग भिलाई ईकाई और हिन्दी विभाग के संयुक्त तत्वावधान में 10 अक्टूबर को कल्याण महाविद्यालय के सभागार में
पत्रकार राजकुमार सोनी के निर्देशन में बनी फिल्म लाल जोहार का प्रदर्शन किया गया.इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह थीं इसमें किसान और मजदूर साथियों के अलावा बड़ी संख्या में छात्र, नौजवान, लेखक और रंगकर्मियों ने अपनी हिस्सेदारी दर्ज की.शहीद शंकर गुहा नियोगी की पत्नी आशा गुहा नियोगी पुत्री क्रांति और मुक्ति गुहा नियोगी ने भी पूरी फिल्म देखी. जन मुक्ति मोर्चा की टीम ने जनगीतों की शानदार प्रस्तुति दी. फिल्म के प्रदर्शन के उपरांत देश के प्रसिद्ध आलोचक सियाराम शर्मा, साहित्यकार कैलाश बनवासी, सुधीर शर्मा, शरद कोकाश, व्यंग्यकार विनोद साव, रंगकर्मी राजेश श्रीवास्तव, जय प्रकाश नायर, सुलेमान खान, युवा समीक्षक भुवाल सिंह ठाकुर और अभिषेक पटेल ने अपने विचार व्यक्त किए. सबने माना कि बेहद कठिन समय में यह फिल्म उम्मीद के साथ संघर्ष को जारी रखने की प्रेरणा देती हैं.
प्रदर्शन के उपरांत पत्रकार राजकुमार सोनी ने दर्शकों को फिल्म के निर्माण के संबंध में जानकारी दी.उन्होंने बताया कि बेहद कठिन परिस्थितियों में मात्र पचास हजार रुपए की लागत से फिल्म का निर्माण किया गया है. यह फिल्म इस भ्रम को भी दूर करने के लिए भी बनाई गई हैं कि इतिहास और विचारधारा की मौत हो गई है. आलोचक सियाराम शर्मा ने फिल्म के निर्माण को कठिन समय में एक जरूरी काम बताया. उन्होंने कहा कि फिल्म देखने के बाद संघर्ष को धारधार करते हुए उसे जारी रखने की उम्मीद और अधिक बढ़ जाती हैं. उन्होंने कहा कि जैसा समय चल रहा है उस लिहाज से आज नियोगी के काम को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है. साहित्यकार सुधीर शर्मा ने फिल्म निर्माण से जुड़े सभी सदस्यों को बधाई देते हुए कहा कि फिल्म अपने जानदार कटेंट की वजह से आने वाले दिनों में जबरदस्त ढ़ंग से चर्चा में रहेगी. आलोचक भुवाल सिंह ठाकुर ने कहा कि फिल्म से किसान और मजदूरों के आंदोलन को गति तो मिलेगी ही...सांस्कृतिक आंदोलन भी मजबूत होगा. व्यंग्यकार विनोद साव ने कहा कि फिल्मकार राजकुमार सोनी की जर्नलिस्टिक एप्रोच साफ दिखाई देती हैं. वे तर्कों और तथ्यों के आधार पर बात करते हैं और विपरीत परिस्थितियों में भी कई तरह की असहमतियों के बीच अपनी बात दमदार तरीक़े से रख पाने में सफल हो जाते हैं. कथाकार कैलाश बनवासी ने फिल्म को एक हथियार की संज्ञा दी. उन्होंने कहा कि फिल्म को देखने के बाद भयावह समय से मुठभेड़ करने का साहस पैदा होता है. रंगकर्मी राजेश श्रीवास्तव ने कहा कि राजकुमार ने सही ढंग से अपने पितरों को श्रद्धाजंलि दी है. नियोगी की पुत्री मुक्ति गुहा ने फिल्म को बंजर भूमि में कोपल का फूटना निरुपित किया. उन्होंने कहा कि यह फिल्म एक चिंगारी का काम करने जा रही है.

इस मौके पर फिल्म के निर्माण से जुड़े रंगकर्मी जय प्रकाश नायर, सुलेमान खान ने भी अपने विचार रखें. फिल्म में अभिनय करने वाले शंकर राव, राजेंद्र पेठे, अप्पला स्वामी, संतोष बंजारा, उमेश बाबू और तत्पुरुष सोनी ने भी दर्शकों के सवालों के जवाब दिए. कार्यक्रम का कुशल संचालन युवा कवि अंजनकुमार ने किया.

ज्ञात हो कि 30 साल पहले 28 सितंबर 1991 को पूंजीपतियों और उनके गुंडों ने श्रमिक नेता शंकर गुहा की हत्या कर दी थीं. नियोगी की स्मृति और उनके कामकाज को ध्यान में रखकर अपना मोर्चा ने डाक्यूमेंट्री फिल्म लाल जोहार बनाई है.

लगभग 45 मिनट की यह डाक्यूमेंट्री पूरे समय दर्शकों को बांधकर रखती है. फिल्म यू ट्यूब पर भी रीलिज की गई है. रीलिज होने के पहले दिन से ही फिल्म के जोरदार कंटेंट को लेकर चर्चा कायम है.फिल्म में नियोगी के आंदोलन से जुड़ी पृष्ठभूमि को बेहद सरल और कलात्मक ढंग से समझाया गया है. जबकि नियोगी के हत्या के बाद उपजे सवाल मन को बेचैन और उद्वेलित करते हैं. जो लोग भी शंकर गुहा नियोगी के कामकाज को जानते-समझते हैं... उनके लिए यह फिल्म एक दस्तावेज की तरह हैं.