भारत रत्न डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर जी का आज जन्मदिन है बाबासाहेब आंबेडकर जयंती पूरे एशिया और आस-पास के देशों में बड़े धूमधाम से मनाई जाती है क्योंकि 2016 में लंदन ऑफ इकोनॉमिक्स कॉलेज में उन्हें सिंबल ऑफ द नॉलेज की उपाधि से नवाजा है और डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर जी भारत के पहले महापुरुष हैं जिन्होंने डॉक्टर ऑफ साइंस की उपाधि जिसमें 8 वर्ष का समय लगता है केवल 3 वर्ष में डॉक्टर ऑफ साइंस का कोर्स पूरा कर लिया था भारत के प्रथम व्यक्ति हैं जिन्होंने लंदन of economics College se DSC ki upadhi prapt ki उसके बाद डीएसए की उपाधि भारत के किसी भी व्यक्ति ने प्राप्त नहीं की उनके निवास स्थान राजगृह मुंबई में 50,000 से अधिक किताबें थी दिल्ली स्थित उनके निवास स्थान में तीन लाख से अधिक किताबें थी डॉक्टर बी आर अंबेडकर जी ऐसे ज्ञानी और विद्वान व्यक्ति हैं जिन्होंने कैलिफोर्निया में 2 वर्ष में 16000 किताबें पढ़ दी इसके अतिरिक्त जब वे लंदन से भारत लौट रहे थे तब उन्होंने 5 दिन की अवधि में 8000 पन्नों की पुस्तक ही पूरी कर ली अब आप स्वयं सोच लीजिए कि डॉक्टर बी आर अंबेडकर जिनके पास 32 डिग्रियां है वह कितने विद्वान होंगे इनके संबंध में एक और महत्वपूर्ण जानकारी जो दो हजार अट्ठारह के जनवरी माह में प्रकाशित हुई थी दिसंबर 2017 में शिकागो में विश्व के जाने-माने परोपकार किए गए मानवता शिक्षा अधिकार अमीर गरीब विभिन्न विषयों पर जिन्होंने मानव समाज के ऊपर सबसे बड़ा काम किया है उस सूची में 100 लोग थे जिसमें प्रथम स्थान तथागत गौतम बुद्ध को दूसरा स्थान चक्रवर्ती सम्राट अशोक को तीसरा स्थान महावीर स्वामी को और चौथा स्थान डॉक्टर बी आर अंबेडकर जी को प्राप्त हुआ है यह समाचार दुनिया के अनेक समाचार पत्र में प्रकाशित हो चुका है

इसके अतिरिक्त डॉ बाबासाहेब आंबेडकर 11 भाषाओं के जानकार थे वह दोनों हाथों से लिखते थे अंग्रेजी लेट इन फ्रेंच जैपनीज तिब्बती पाली संस्कृत हिंदी मराठी पारसी गुजराती अन्य और तीन भाषाओं के वे बड़े विद्वान थे डॉक्टर बी आर अंबेडकर जी ने भारत के संविधान में अनेक ऐसी व्यवस्था दी है जिसके आधार पर जाति प्रथा बड़ी आसानी से समाप्त की जा सकती है धर्मनिरपेक्ष प्रजातांत्रिक लोकतांत्रिक एवं समाजवादी व्यवस्था इस प्रजातंत्र रूबी गणराज्य के लिए समावेशी है अर्थात डॉक्टर बी आर अंबेडकर जी कि यह सोच थी कि इस देश में आने वाले समय में अमीर और गरीब के बीच की खाई समाप्त की जाए
डॉक्टर बी आर अंबेडकर जी कि यह भी सोच थी कि इतना बड़ा विशाल भारत देश जिसमें हजारों किस्म की जातियां हैं इसके बाद भी हमारे देश में अनेकता में एकता बनी रहेगी वे चाहते थे कि जिस प्रकार विदेशों में ज्ञान और शिक्षा के आधार पर व्यक्तियों को सम्मान मिलता है वह सम्मान भारत में नहीं भारत में व्यक्ति की जाति के आधार पर सम्मान दिया जाता है यही कारण है कि
डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर जी ने अपने संविधान की प्रस्तावना में यह लिखा कि हम भारत के लोग उन्होंने यह नहीं लिखा कि हम हिंदुस्तान के लोग हैं वे जानते थे की इस देश के संविधान के माध्यम से सभी जाति धर्म के लोगों को समता बंधुता न्याय स्वतंत्रता शिक्षा विकास और उन्नति बराबर बराबर मिल सके क्योंकि उन्होंने भारत की राजनीति सामाजिक स्थिति आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति महिला बच्चे बूढ़े गरीब और पिछड़े का अध्ययन किया था और जब भी विदेश पढ़ने गए तो उनके जीवन का अनुभव और उन्होंने जो उच्च शिक्षा प्राप्त की उसमें उन्होंने यह देखा कि अमेरिका के लोगों के जीवन जीने का तरीका उनकी शिक्षा और भारत के लोगों के जीवन जीने का तरीका और भारत की शिक्षा में सूर्य और पृथ्वी जैसा अंतर है और इसलिए उन्होंने सार्वजनिक तौर पर घोषणा की कि मेरे गरीब भाइयों बहनों माताओं ग्राम और देहात और पहाड़ों से निकलकर शहरों की ओर आओ मजदूरी करो लेकिन अपने बच्चों को जरूर पढ़ाओ क्योंकि शिक्षा के माध्यम से ही आपकी सामाजिक परिस्थिति में परिवर्तन आ सकता है
डॉक्टर बी आर अंबेडकर जी शिक्षा के माध्यम से विश्व में सबसे अधिक सम्मान पाने वाले व्यक्तियों में से एक हैं
अमेरिका राष्ट्रपति बराक ओबामा जी ने कहा था कि यदि डॉक्टर बी आर अंबेडकर जी अमेरिका में पैदा हुए रहते तो अमेरिका के नागरिक उन्हें सूर्य की भांति सम्मान देते
नोबेल पुरस्कार प्राप्त अमरत्य सेन ने डॉ बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर के संबंध में कहा अर्थशास्त्र के विषय में डॉक्टर बी आर अंबेडकर मेरे पिता है
ओशो रजनीश ने कहा कि जब मैं डॉक्टर बी आर अंबेडकर जी से मुंबई में मुलाकात किया तब मैंने यह अनुभव किया कि आप भारत के सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे विद्वान व्यक्ति है ऐसे अनेक विषय हैं जिस पर जितना ज्यादा लिखा जाए उतना कम है कुछ बिंदु यदि छोटे हो तो आप वेबसाइट में डाल सकते हैं
आपका बी एस जागृत
छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष भारतीय बौद्ध महासभा